Lab Certified Products      |      An ISO 9001:2015 certified       |      Call Us :+91 9910801233

Rules to Wear

Rudraksha can be worn on any auspicious days like on Monday, Poornima,  Shravan month, Navratri, Shivaratri, Mahashivratri, during Pushya Nakshatra and during eclipse . Rahukaal ,yamkaal & pitra paksha should be avoided to wear Rudraksha.

The wearer of the Rudraksha should ideally avoid eating non vegetarian food and consumption of alcohol. One who eats /consumes Non-Veg / Alcohol should Chant Om Namah Shivaya mantra 51/108 times to keep Rudraksha energized.

Rudraksha must not be taken to the cremation grounds and funerals. Also it must not be taken to the place while visiting a new born baby. 

Avoid Wearing the Rudraksha while having physical relationship. 

Women should not wear the Rudraksha when nature is at its work. 

Dust and dirt can settle in the pores of the bead. Avoid sprinkling talcum powder on Rudraksha as it will close pores of Rudraksha and result in accumulation of dirt. Clean the beads frequently with soft, fine bristles ( Baby toothbrush). Apply olive oil with sandalwood oil mixed on Rudraksha as and when required.

Rudraksha beads/mala should not be shared / exchanged / transferred /from one person to another person after it has been worn.

Avoid showing your Rudraksha mala /beads to everyone. It should be hidden and kept secret to get maximum benefits.

Rudraksha should not be worn during shower/bath. That is to prevent the rudraksha from becoming wet. Regularly keep on wetting rudrakshas beads will lessen the longevity of the beads. Even if Rudraksha are worn during bath , keep them away from Soap , as it penetrates the bead pores and makes them dehydrated.

pH value for Rudraksha is generally above 4.82. Rudraksha is basically acidic. Nuts from unripe fruits are more acidic. 

Brief Puja of beads/Mala: Sprinkle gangajal on holy beads. Apply astha gandha on it. Light a cow ghee lamp ( Deepak). Offer Akshat ( unbroken rice). Offer flowers. Chant Om Namah Shivaya mantra 108 times. If you have Shivlinga at home, touch the beads to it or put beads in feet’s of Lord Shiva. Seek blessings of Lord Shiva keeping your desire in mind and wear the mala.

किसी भी शुभ दिन में जैसे सोमवार पूर्णिमा श्रावण मास नवरात्रि शिवरात्रि महाशिवरात्रि पुष्य नक्षत्र और ग्रहण के समय रुद्राक्ष को धारण किया जा सकता है। राहुकाल यमकाल पितृ पक्ष में रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए।

रुद्राक्ष पहनकर शमशान या किसी अंत्येष्टि कर्म में अथवा प्रसूति ग्रह में ना जाएं। स्त्रियां मासिक धर्म के समय रुद्राक्ष धारण ना करें । रात्रि शयन के समय रुद्राक्ष उतार देने चाहिए।

यह धारणा जनमानस में व्याप्त है कि मांस और मदिरा का सेवन करने वाले व्यक्ति रुद्राक्ष धारण नहीं कर सकते किंतु शास्त्रों में जैसे की देवी भागवत में स्पष्ट उल्लेख है कि अभक्ष्य पदार्थों का सेवन करने वाला व्यक्ति भी रुद्राक्ष को पहनने से रूद्र स्वरूप हो जाते हैं। यह देखा गया है कि रुद्राक्ष के प्रभाव से अभक्ष्य पदार्थ का सेवन करने वाला व्यक्ति धीरे धीरे स्वता ही इन्हें त्यागने लगता है और कुछ समय पश्चात लगभग छोड़ ही देता है इसलिए मांस मदिरा आदि की छुटकारा पाने के लिए आदतों से छुटकारा पाने के लिए भी रुद्राक्ष धारण किया जा सकता है।

समय-समय पर टूथ ब्रश लेकर के रुद्राक्ष की सफाई करनी चाहिए इसके पश्चात ऑलिव ऑयल और चंदन का इत्र मिलाकर के रुद्राक्ष पर लगाना चाहिए।

रुद्राक्ष को धारण करने से रुद्राक्ष और रुद्राक्ष के धारण करता के बीच एक संबंध स्थापित हो जाता है इसी कारण से अपना रुद्राक्ष दूसरे को नहीं देना चाहिए और जहां तक संभव हो रुद्राक्ष को इस तरह से धारण करना चाहिए कि वह दिखाई ना दे।

इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि रुद्राक्ष पर टेलकम पाउडर ना लगे नहीं तो रुद्राक्ष के छिद्र बंद हो जाएंगे जिसके कारण रुद्राक्ष की शक्ति में कमी आएगी। नहाते वक्त रुद्राक्ष नहीं धारण करना चाहिए ऐसा करने से कुछ दिनों में रुद्राक्ष का रंग पूर्णता काला पड़ जाएगा।

इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि रुद्राक्ष का कभी भी दूध दही घी से अभिषेक नहीं करना चाहिए ऐसा करने से रुद्राक्ष में कीड़े उत्पन्न होने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे रुद्राक्ष नष्ट हो जाएगा।

 

Powered By Laxmi Narayan International
Laxmi Narayan International © 2019